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Karmveer: Dekh Kar Badha Vividh - Arth, Bhavarth & Lyrics | Hariaudh

जीवन में सफलता उन्हीं को मिलती है जो बाधाओं से डरकर नहीं, बल्कि उनका सामना करके आगे बढ़ते हैं। हिंदी साहित्य के आकाश में ध्रुव तारे की तरह चमकने वाले की कविता "कर्मवीर" (Karmveer) हमें यही सिखाती है। यह कविता, जिसकी प्रसिद्ध पंक्तियाँ "देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं" हैं, निराशा के क्षणों में संजीवनी का काम करती है।

Dekh Kar Badha Vividh Poem by Hariaudh - Karmveer Lyrics in Hindi कर्मवीर: अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कालजयी प्रेरणादायक कविता।

जिस प्रकार हरिवंश राय बच्चन की 'अग्निपथ' हमें संघर्ष की आग में तपकर कुंदन बनने की प्रेरणा देती है, वैसे ही 'हरिऔध' जी की यह रचना हमें कर्मपथ पर अडिग रहने का सन्देश देती है। चाहे आप छात्र हों या जीवन के किसी भी क्षेत्र में संघर्ष कर रहे हों, यह कविता आपके भीतर एक नई ऊर्जा का संचार करेगी।

कर्मवीर (Karmveer) - Poem Lyrics

देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं।
रह भरोसे भाग के दुख भोग पछताते नहीं॥
काम कितना ही कठिन हो किन्तु उकताते नहीं।
भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं॥
हो गये एक आन में उनके बुरे दिन भी भले।
सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले फले॥

आज करना है जिसे करते उसे हैं आज ही।
सोचते कहते हैं जो कुछ कर दिखाते हैं वही॥
मानते जो भी हैं सुनते हैं सदा सबकी कही।
जो मदद करते हैं अपनी इस जगत में आप ही॥
भूल कर वे दूसरों का मुँह कभी तकते नहीं।
कौन ऐसा काम है वे कर जिसे सकते नहीं॥

Dekh Kar Badha Vividh, Bahu Vighn Ghabraate Nahi | Motivational Poems In Hindi Dekh Kar Badha Vividh, Bahu Vighn Ghabraate Nahi | Motivational Poems In Hindi

जो कभी अपने समय को यों बिताते हैं नहीं।
काम करने की जगह बातें बनाते हैं नहीं॥
आज कल करते हुए जो दिन गँवाते हैं नहीं।
यत्न करने से कभी जो जी चुराते हैं नहीं॥
बात है वह कौन जो होती नहीं उनके लिये।
वे नमूना आप बन जाते हैं औरों के लिये॥

व्योम को छूते हुए दुर्गम पहाड़ों के शिखर।
वे घने जंगल कि जहाँ रहता है तम आठों पहर॥
गर्जते जल-राशि की उठती हुई ऊँची लहर।
आग की भयदायिनी फैली दिशाओं में लपट॥
ये कंपा सकती कभी जिसके कलेजे को नहीं।
भूलकर भी वह नहीं नाकाम रहता है कहीं॥

~ अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
(स्रोत: विकिपीडिया)

शब्दार्थ (Word Meanings)

शब्द (Word)अर्थ (Meaning)
बाधा / विघ्नरुकावट, मुसीबत (Obstacle)
विविधअनेक प्रकार के (Various)
उकतातेघबराते या थकते (Get bored/tired)
व्योम (Vyom)आकाश (Sky)
तम (Tam)अंधकार (Darkness)
दुर्गमजहाँ जाना कठिन हो (Inaccessible)
यत्नप्रयास, कोशिश (Effort)

कविता का भावार्थ (Summary & Explanation)

'कर्मवीर' कविता में कवि ने उन साहसी और परिश्रमी व्यक्तियों का गुणगान किया है जो भाग्य के भरोसे नहीं बैठते। सच्चा कर्मवीर वही है जो हजारों मुसीबतों (Vighn) को देखकर भी घबराता नहीं है।

जैसे सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की रचनाओं में ओज है, वैसे ही यहाँ कवि कहते हैं कि कर्मवीर व्यक्ति 'आज' का काम 'आज' ही पूरा करते हैं। वे आलस्य में अपना समय नष्ट नहीं करते और न ही काम टालने के लिए "जो बीत गई सो बात गई" के इंतज़ार में रहते हैं, बल्कि वे वर्तमान को संवारते हैं।

कर्मवीर की विशेषताएं:

  • आत्मनिर्भरता: वे अपनी मदद स्वयं करते हैं, दूसरों का मुँह नहीं ताकते।
  • समय का सदुपयोग: वे बातों के शेर नहीं, बल्कि कर्म के धनी होते हैं।
  • साहस: चाहे आसमान (व्योम) को छूने वाले पहाड़ हों या भयानक जंगल, कोई भी डर उनके संकल्प को डिगा नहीं सकता।

यह कविता हमें महाभारत के कर्ण और भीष्म पितामह जैसी दृढ़ प्रतिज्ञा की याद दिलाती है। जिस तरह भीष्म ने भीषण प्रतिज्ञा ली थी, उसी तरह एक कर्मवीर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहता है।

प्रेरणा के अन्य स्रोत

साहित्यशाला पर उपलब्ध अन्य रचनाएँ जो आपके मनोबल को ऊँचा उठाएंगी:
यदि आप जीवन की असफलताओं से निराश हैं, तो जाकिर खान की 'मैं शून्य पे सवार हूँ' जरूर पढ़ें। वहीं, अगर आप संघर्ष की पराकाष्ठा को समझना चाहते हैं, तो प्रभु राम के मानवीय संघर्ष और दानवीर कर्ण की गाथा आपको नई दिशा देगी। छोटी और प्रभावशाली कविताओं के लिए यहाँ क्लिक करें।

Watch Video: Dekh Kar Badha Vividh (Lyrical)

इस कविता को सस्वर सुनने से इसका प्रभाव दोगुना हो जाता है। नीचे दिए गए वीडियो में इसका सुंदर पाठ देखें:

यह पाठ विशेष रूप से कक्षा 8–10 के छात्रों के लिए उपयोगी है।
Video Credit: The Gyansindhu (YouTube)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

Q: 'देख कर बाधा विविध' (कर्मवीर) कविता के रचयिता कौन हैं?

इस प्रेरणादायक कविता के रचयिता हिंदी साहित्य के महान कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' हैं। यह कविता उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है।

Q: 'कर्मवीर' कविता का मुख्य संदेश क्या है?

इस कविता का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को बाधाओं से घबराना नहीं चाहिए। भाग्य के भरोसे बैठने की बजाय परिश्रम और दृढ़ संकल्प से अपनी राह खुद बनानी चाहिए।

Q: 'व्योम को छूते हुए दुर्गम पहाड़ों के शिखर' पंक्ति का अर्थ क्या है?

इसका अर्थ है कि चाहे लक्ष्य कितना भी कठिन या ऊँचा (जैसे आकाश को छूते पहाड़) क्यों न हो, एक कर्मवीर व्यक्ति उसे पाने के लिए हर दुर्गम रास्ते को पार कर लेता है।

मित्रों, 'कर्मवीर' केवल एक कविता नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। हमें उम्मीद है कि Sahityashala का यह प्रयास आपको पसंद आया होगा। हिंदी साहित्य की ऐसी ही अनमोल मणियों के लिए हमारे होम पेज पर जाएँ और मैथिली कविताओं का भी आनंद लें।

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