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Parashuram Ka Shishya Khada Hai - Karna Poem Lyrics | Raudra Roop & Meaning

The battlefield of Kurukshetra has witnessed many warriors, but few entries are as explosive as that of Angaraj Karna. Often searched by poetry lovers as "Parashuram ka shishya khada hai," this Inspirational Hindi Poem captures the Raudra Roop (Fierce Form) of Karna, comparing his fury directly to Lord Shiva's destruction.

Unlike the calm resilience seen in Bhishma's Vow (Pratigya), this composition is pure Veer Ras (Heroic Sentiment). Below, we present the complete lyrics and meaning of this viral masterpiece, which stands tall alongside Ramdhari Singh Dinkar's classic Mahabharata poetry.

Karna appearing as the fierce Raudra Roop of Shiva in Mahabharata war
"Maharaj yeh Karna nahi, yeh Raudra Roop hai Shankar ka..."

|| हे कलियुग ! यह कर्ण नहीं, यह रौद्र रूप है शंकर का ||

यह शौर्यमयी परिदृश्यों की एक भौगोलिक संरचना है,
क्षण सम्मोहन, कर्ण पराक्रम, युद्ध क्षेत्र की रचना है |
जिसके पौरूष, प्रबल, पराक्रम पर पांडव घबराते है,
मन्त्र-मुग्ध संजय जिसका गुणगान सुनाये जाते है ||

क्या वर्ण कहूँ, क्या धार कहूँ, इसके निषंग के हर शर का |
महाराज यह कर्ण नही, यह रौद्र रूप है शंकर का ||

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छाती की पसली कवच हुई कुंडल का छिद्र है कानों में |
है अभाव किन्तु कर्ण को किया नही विचलित बाणों ने,
नेत्रों में तेज है दिनकर का, भृकुटी प्रत्यंचा रूपक हैं,
तांडव को तत्पर महादेव का ध्वनि विनाश का सूचक हैं ||

Suryaputra Karna stretching his bow on the battlefield

शल्य स्वयं अवरोधित कर पाते न वेग है अश्वों का,
नेत्र मेरे जो देख रहे वे उत्प्रेरक रूप है दृश्यों का |
रोम-रोम रणभेरी है यह रण गर्जन है कड़-कड़ का,
महाराज यह कर्ण नही, यह रौद्र रूप है शंकर का ||

कर्ण बन क्रूदांत काल पांडव सेना पर टूट पड़े,
त्राहि-त्राहि की आवाजे है कर्ण मृत्यु बन युद्ध करे |
आज युद्ध में स्वयं कर्ण यमराज दिखाई पड़ते हैं,
और मूर्क्षित होकर सारे सैनिक कुरूक्षेत्र में गिरते हैं||

Deep Dive: While Karna fights like a demon here, his life was filled with tragedy. Read the Summary of Rashmirathi Sarg 1 or explore the heartbreaking Parashuram Curse (Sarg 2) that sealed his fate.

इस प्रकार वो युद्ध क्षेत्र में लाश बिछाये फिरते हैं,
लगता है जैसे अन्तरिक्ष से रक्त की वर्षा करते हैं |
चक्षु मेरे उद्वेलित है और साक्षी बनते इस रण का,
महाराज यह कर्ण नही, यह रौद्र रूप है शंकर का ||

सूर्य का ही तूर्य होने चला अब कर्ण हैं,
पार्थ को खोजे फिरे और हिंसक नयन हैं |
सारथी जो कृष्ण है रथ को भगाये जा रहे हैं,
पार्थ को राधेय से बचाये जा रहे हैं||

परशुराम का शिष्य खड़ा है बनके सूरज इस रण का

ज्ञात हो कर्ण को इंद्र का वरदान हैं,
कर्ण के उस शस्त्र पर पार्थ का अवसान हैं |
सार्वभौमिक सत्य है यह कर्ण का संग्राम हैं,
कुरूक्षेत्र में वह युद्ध का रचता नया आयाम हैं ||

परशुराम का शिष्य खड़ा है बनके सूरज इस रण का,
हे पार्थ सुनो ! यह कर्ण नही, यह रौद्र रूप है शंकर का ।
महाराज क्या कर्ण कहे उसके वाणी में सुने जरा,
और हृदय का कौतुहल उसके वाणी में बुने जरा ||

हे शल्य ! हयो को तेज करो और वेगवान हो उड़ो वहाँ,
तूफानों को पृथक करो ले चलो खड़े हो श्याम जहाँ |
श्याम को है बाँधना, पार्थ पर सर साधना,
आज इस ब्रह्माण्ड में महि को है मुझे लांघना ||

The Opponent: While Karna was aggressive, his friend Duryodhana was equally complex. Read the Hindi Poem on Duryodhan to understand their bond. Also, see Aree Kaan Kholkar Suno Parth for another fiery dialogue.

काल को जकड़े चला मैं, काल क्या कर लेगा मेरा,
काल के विपरीत काली रात से निकला सवेरा ||

संजय भी यह दृश्य देख स्वयं नही रूक पाते हैं,
युद्ध कला रमणीय देखकर नतमस्तक हो जाते हैं |
अंग-अंग विद्युत् के जैसा प्रतीत हो जिस नर का,
महाराज यह कर्ण नही, यह रौद्र रूप है शंकर का ||

Poem Analysis: The Raudra Roop of Karna

This poem deviates from the traditional portrayal of Karna as merely a "Danveer" (Charitable Hero). Here, he is the God of Death. The poet Vivek Kautalya uses the metaphor of Lord Shiva's Raudra Roop to describe Karna's unstoppable momentum.

Just as Bhishma Pitamah commanded respect through age and wisdom, Karna commanded fear through raw power. This intensity is why this poem is often recited alongside Mahabharat Hindi Kavita classics.

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For a complete collection of such verses, visit our Mahabharata Poems archive.

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Frequently Asked Questions

Who is the poet of "Parashuram Ka Shishya Khada Hai"?

This viral Hindi poem is attributed to Vivek Kautalya. It is widely shared on social media for its high energy and powerful depiction of Karna's warrior spirit.

What is the meaning of "Raudra Roop Hai Shankar Ka"?

"Raudra Roop" means the "Fierce Form." The poet is saying that on the battlefield, Karna is not just a human warrior; he looks as destructive and terrifying as Lord Shiva (Shankar) performing the Tandav dance of destruction.

Where can I find more poems like this?

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