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Jo Beet Gayi So Baat Gayi: Lyrics & Meaning (भावार्थ) | Harivansh Rai Bachchan

जीवन में कई बार ऐसे क्षण आते हैं जब हम अतीत के दुख, खोए हुए अवसरों या टूटे हुए रिश्तों के बोझ तले दब जाते हैं। ऐसे कठिन समय में हरिवंश राय बच्चन जी की कालजयी रचना "जो बीत गई सो बात गई" हमें संबल देती है। यह केवल एक कविता नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक मंत्र है।

हिंदवी (Hindwi) और कविता कोश जैसे प्रतिष्ठित साहित्यिक मंचों पर बच्चन जी को मानवीय संवेदनाओं का कवि माना गया है। जैसे उनकी रचना अग्निपथ हमें संघर्ष करना सिखाती है, वैसे ही यह कविता हमें अतीत को भुलाकर भविष्य की ओर देखना सिखाती है। चाहे पथ की पहचान हो या नीड़ का निर्माण, उनकी हर रचना हिंदी प्रेरणादायक कविताओं की धरोहर है।

Jo Beet Gayi So Baat Gayi Lyrics (Hindi)

जीवन में एक सितारा था माना वह बेहद प्यारा था वह डूब गया तो डूब गया अंबर के आनन को देखो कितने इसके तारे टूटे कितने इसके प्यारे छूटे जो छूट गए फिर कहाँ मिले पर बोलो टूटे तारों पर कब अंबर शोक मनाता है जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम थे उस पर नित्य निछावर तुम वह सूख गया तो सूख गया मधुबन की छाती को देखो सूखीं कितनी इसकी कलियाँ मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ जो मुरझाईं फिर कहाँ खिलीं पर बोलो सूखे फूलों पर कब मधुबन शोर मचाता है जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था तुमने तन मन दे डाला था वह टूट गया तो टूट गया मदिरालय का आँगन देखो कितने प्याले हिल जाते हैं गिर मिट्टी में मिल जाते हैं जो गिरते हैं कब उठते हैं पर बोलो टूटे प्यालों पर कब मदिरालय पछताता है जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिट्टी के बने हुए मधु घट फूटा ही करते हैं, लघु जीवन लेकर आए हैं प्याले टूटा ही करते हैं फिर भी मदिरालय के अंदर मधु के घट हैं, मधु प्याले हैं, जो मादकता के मारे हैं वे मधु लूटा ही करते हैं वह कच्चा पीने वाला है जिसकी ममता घट प्यालों पर जो सच्चे मधु से जला हुआ कब रोता है, चिल्लाता है जो बीत गई सो बात गई

भावार्थ (Meaning in Hindi)

हरिवंश राय बच्चन जी ने इस कविता में प्रकृति के उदाहरणों के माध्यम से "अतीत को त्यागने" (Letting Go) का संदेश दिया है।

1. अंबर और तारे

कवि कहते हैं कि आकाश को देखो। हर रात उसके अनगिनत तारे टूटते हैं, लेकिन आकाश कभी शोक नहीं मनाता। वह अपनी विशालता में शांत रहता है। इसी तरह, हमें भी जीवन में खोई हुई चीजों पर विलाप करने के बजाय आगे बढ़ना चाहिए।

2. मधुबन और फूल

बगीचे में रोज कितनी कलियां सूखती हैं और फूल मुरझाते हैं, लेकिन उपवन कभी शोर नहीं मचाता। वह नए सृजन में व्यस्त रहता है। यह वही आशावाद है जो हम मैथिलीशरण गुप्त की 'मनुष्यता' में भी पाते हैं।

3. मदिरालय और प्याला

तीसरे और चौथे पद में बच्चन जी ने अपनी प्रसिद्ध 'मधुशाला' शैली का प्रयोग किया है। प्याले (शरीर/रिश्ते) मिट्टी के बने हैं और उनका टूट जाना निश्चित है। जो "कच्चा पीने वाला" (अज्ञानी) है, वही प्याले के टूटने पर रोता है। लेकिन जो "सच्ची मदिरा" (जीवन का आनंद) का प्रेमी है, वह जानता है कि परिवर्तन ही सत्य है। यह दर्शन उनकी कविता क्या करूँ संवेदना लेकर तुम्हारी में भी झलकता है।

Jo Beet Gayi So Baat Gayi Lyrics (Hinglish)

Jivan mein ek sitara tha Maana vah behad pyaara tha Vah doob gaya toh doob gaya Ambar ke aangan ko dekho Kitne iske tare toote Kitne iske pyaare chhoote Jo chhoot gaye fir kahan mile Par bolo toote taaron par Kab ambar shok manaata hai Jo beet gayi so baat gayi

Jivan mein tha vah ek kusum The uspar nitya nichhawar tum Vah sookh gaya toh sookh gaya Madhuvan ki chhati ko dekho Sookhi kitni iski kaliyan Murjhayi kitni iski vallariyan Jo murjhayi fir kahan khili Par bolo sookhe phoolon par Kab madhuvan shor machaata hai Jo beet gayi so baat gayi

Jivan mein madhu ka pyaala tha Tumne tan man de daala tha Vah toot gaya to toot gaya Madiralay ka aangan dekho Kitne pyaale hil jaate hain Gir mitti mein mil jaate hain Jo girte hain kab uthte hain Par bolo toote pyaalon par Kab madiralay pachhtata hai Jo beet gayi so baat gayi

Mridu mitti ke hain bane hue Madhu ghat foota hi karte hain Laghu jivan lekar aaye hain Pyaale toota hi karte hain Fir bhi madiralay ke andar Madhu ke ghat hain madhu ke pyaale hain Jo maadakta ke maare hain Ve madhu loota hi karte hain Vah kachcha peene wala hai Jiski mamta ghat pyaalon par Jo sachche madhu se jala hua Kab rota chillata hai Jo beet gayi so baat gayi

वीडियो देखें: अमिताभ बच्चन द्वारा कविता पाठ

इस कविता का असली मर्म अमिताभ बच्चन की आवाज़ में सुनकर ही समझा जा सकता है। नीचे दिए गए वीडियो में देखें:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: 'जो बीत गई सो बात गई' कविता का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस कविता का मुख्य संदेश है - अतीत को भूलकर आगे बढ़ना। कवि कहते हैं कि जो समय या अवसर चला गया, उस पर शोक मनाने के बजाय हमें जीवन में बचे हुए अवसरों का आनंद लेना चाहिए।
प्रश्न: यह कविता किसने लिखी है?
उत्तर: यह कविता हिंदी साहित्य के महान कवि हरिवंश राय बच्चन जी ने लिखी है।

निष्कर्ष

जीवन के विशाल कैनवस पर, दुख को पकड़ कर रखना हमारी प्रगति को रोकता है। जो बीत गई सो बात गई केवल एक कहावत नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है। बच्चन जी की अन्य रचनाओं और साहित्य के लिए हमारे English Sahityashala और मैथिली कविता अनुभाग को ज़रूर पढ़ें। अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए साहित्यशाला फाइनेंस पर भी जाएं।

अतीत को बीतने दें, और नए सवेरे का स्वागत करें।

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