इतिहास के पन्नों में और जीवन के युद्धक्षेत्र में, कई बार केवल ओजस्वी शब्द ही हमारे भीतर सोए हुए योद्धा को जगा पाते हैं। जब भारत के 'गोल्डन बॉय' नीरज चोपड़ा ने टोक्यो के आसमान को अपने भाले से भेदा, तो पूरा देश एक ही कविता गुनगुना रहा था: "तू भी है राणा का वंशज, फेंक जहाँ तक भाला जाए।"
मशहूर शायर वाहिद अली 'वाहिद' की यह रचना केवल खेल के मैदान तक सीमित नहीं है। यह महाराणा प्रताप के अदम्य साहस और शौर्य का आह्वान है। यह हमें याद दिलाती है कि हम उसी मिट्टी के बने हैं, जिसकी गाथाएं गोरा बादल जैसी कविताओं में गूंजती हैं। चाहे वह महाभारत का रणक्षेत्र हो या जीवन का संघर्ष, "होना या न होना" (To be or not to be) की दुविधा (द्वन्द) का अंत होना ही चाहिए।
आइए, इस वायरल कविता के पूर्ण बोल (Lyrics) और इसके गहरे अर्थ को समझते हैं, जो हमें अपने संदेहों के अग्निपथ को पार कर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देती है।
राणा का क्रोध: वह जज्बा जो कभी झुकता नहीं।
तू भी है राणा का वंशज (Original Hindi Lyrics)
द्वन्द कहाँ तक पाला जाए,
युद्ध कहाँ तक टाला जाए,
तू भी है राणा का वंशज,
फेंक जहाँ तक भाला जाए।
दोनों ओर लिखा हो भारत,
सिक्का वही उछाला जाए।
इस बिगड़ैल पड़ोसी को तो,
फिर शीशे में ढाला जाए।
दूध छीन बच्चों के मुख से,
क्यों नागों को पाला जाए?
वाहिद के घर दीप जले तो,
मंदिर तलक उजाला जाए।
तू भी है राणा का वंशज,
फेंक जहाँ तक भाला जाए।
~ वाहिद अली 'वाहिद'
Tu Bhi Hai Rana Ka Vanshaj (Hinglish Lyrics)
Dwand kahan tak paala jaaye,
Yudh kahan tak taala jaaye,
Tu bhi hai Rana ka vanshaj,
Fenk jahan tak bhala jaaye.
Dono ore likha ho Bharat,
Sikka wahi uchhala jaaye.
Is bigdail padosi ko to,
Phir sheeshe mein dhaala jaaye.
Doodh cheen bachchon ke mukh se,
Kyon naagon ko paala jaaye?
Wahid ke ghar deep jale to,
Mandir talak ujaala jaaye.
Tu bhi hai Rana ka vanshaj,
Fenk jahan tak bhala jaaye.
भावार्थ और विश्लेषण: जीत का मंत्र
1. द्वन्द (Dwand) का अंत
कविता की शुरुआत एक बहुत ही सशक्त प्रश्न से होती है: "आखिर कब तक हम मन की दुविधा में फंसे रहेंगे?" जैसे कुरुक्षेत्र में अर्जुन के मन में युद्ध से पहले संशय था, वैसे ही हर व्यक्ति किसी बड़े कदम से पहले हिचकिचाता है। कवि कहते हैं कि संघर्ष (युद्ध) जीवन का सत्य है, इसे टाला नहीं जा सकता। अब सोचने का वक़्त गया, अब कर्म करने का समय है।
विरासत और स्वाभिमान: मेवाड़ का शौर्य जो हमें कभी हार न मानने की प्रेरणा देता है।
2. राणा प्रताप की विरासत
महाराणा प्रताप का नाम लेते ही रगों में स्वाभिमान दौड़ जाता है। कवि याद दिलाते हैं कि हम उसी शूरवीर परंपरा के वारिस हैं। 'भाला' (Spear/Javelin) यहाँ हमारे प्रयास (Effort) का प्रतीक है। संदेश साफ़ है: अपनी पूरी ताकत और शिद्दत से प्रयास करो, यह मत सोचो कि भाला कितनी दूर जाएगा। जैसे रश्मिरथी में कर्ण अपनी क्षमताओं को पहचानता है, वैसे ही तुम्हें अपनी शक्ति पहचाननी होगी।
3. राष्ट्र सर्वोपरि (Nationalism)
"दोनों ओर लिखा हो भारत" - यह पंक्ति राष्ट्रवाद की पराकाष्ठा है। यानी, सिक्का चाहे किसी भी करवट गिरे (Head or Tail), जीत हमेशा भारत की होनी चाहिए। यह भावना सुभद्रा कुमारी चौहान की झाँसी की रानी जैसी कविताओं की याद दिलाती है, जहाँ व्यक्तिगत लाभ से ऊपर देशहित होता है।
सीमाओं को तोड़ दो: "फेंक जहाँ तक भाला जाए" - सफलता का आधुनिक मंत्र।
4. शत्रु को चेतावनी
'बिगड़ैल पड़ोसी' का संदर्भ यहाँ भू-राजनीतिक तनावों (Geopolitical tensions) की ओर है। कवि कहते हैं कि जो हमारे संसाधनों (दूध) पर पल रहे हैं और हमें ही डंस रहे हैं (नाग), उन्हें शीशे में उतारना (सही राह दिखाना या सबक सिखाना) जरूरी है। यह तेवर सिंहासन खाली करो जैसी क्रांतिकारी कविताओं में भी मिलता है, जो संप्रभुता की रक्षा की बात करती हैं।
इस वीर रस के पीछे की प्रेरणा को और गहराई से समझने के लिए आप महाराणा प्रताप की जीवनी पढ़ सकते हैं।
देखिए: डॉ. कुमार विश्वास का ओजस्वी पाठ
इस कविता की गूंज तब और बढ़ गई जब डॉ. कुमार विश्वास ने मंच से इसे पढ़ा और वाहिद अली 'वाहिद' को इसका श्रेय दिया। सुनिए यह शानदार प्रस्तुति:
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: 'तू भी है राणा का वंशज' कविता के कवि कौन हैं? उत्तर: यह कविता प्रसिद्ध शायर वाहिद अली 'वाहिद' द्वारा लिखी गई है। अक्सर लोग इसे अज्ञात मान लेते हैं, लेकिन कुमार विश्वास ने भी मंचों पर वाहिद साहब का नाम लिया है। प्रश्न: कविता में 'द्वन्द' का क्या अर्थ है? उत्तर: 'द्वन्द' का अर्थ है मन की दुविधा, असमंजस या हिचकिचाहट। कवि कहते हैं कि सफलता पाने के लिए इस दुविधा को छोड़कर कर्म करना होगा। प्रश्न: क्या यह कविता नीरज चोपड़ा के लिए लिखी गई थी? उत्तर: यह कविता पहले लिखी गई थी, लेकिन जब नीरज चोपड़ा ने टोक्यो ओलंपिक में 'भाला' (Javelin) फेंककर गोल्ड मेडल जीता, तो यह कविता उनकी जीत का 'एंथम' (Anthem) बन गई। प्रश्न: 'राणा का वंशज' होने का क्या तात्पर्य है? उत्तर: इसका अर्थ है महाराणा प्रताप जैसा स्वाभिमान और साहस रखना। यह पंक्ति याद दिलाती है कि हम उस संस्कृति से हैं जहाँ कर्ण और प्रताप जैसे योद्धाओं ने कभी हार नहीं मानी।निष्कर्ष
"तू भी है राणा का वंशज" मात्र एक कविता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत का 'युद्धघोष' (War Cry) है। यह हमें सिखाती है कि चाहे सीमा पर खड़ा जवान हो, खेल के मैदान में खिलाड़ी, या जीवन की चुनौतियों से जूझता आम इंसान—संशय ही सबसे बड़ा शत्रु है। हमें अपनी पहचान पर गर्व करना चाहिए और अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहिए।
तो जब भी मन में डर या दुविधा हो, इन पंक्तियों को याद करें। अपना भाला (लक्ष्य) उठाएं, निशाना साधें और पूरी ताकत से फेंक दें। जय हिन्द।