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“मैं अब विदा लेता हूँ” पाश की कविता | Meaning, Analysis & Hindi–Hinglish Lyrics

पाश की कविता "मैं अब विदा लेता हूँ": प्रेम और क्रांति के बीच खड़े एक शूरवीर का अंतिम पत्र

जब भी दुनिया के किसी भी कोने में विद्रोह और प्रेम की बात एक साथ होगी, तो अवतार सिंह संधू 'पाश' की कविता "मैं अब विदा लेता हूँ" ज़रूर याद की जाएगी। जैसे पाश ने अपनी बहुचर्चित कविता "सबसे ख़तरनाक" में मुर्दा शांति और मरते हुए सपनों पर प्रहार किया था, वैसे ही यह कविता एक क्रांतिकारी के भीतर चल रहे उस मनोवैज्ञानिक युद्ध का दस्तावेज़ है, जहाँ उसे अपने निजी प्रेम और सामाजिक दायित्व के बीच किसी एक को चुनना है।

साहित्यशाला की इस पाश-शृंखला (Pash Series) की यह दूसरी कड़ी केवल एक कविता नहीं है, बल्कि यह एक प्रेमी का अपनी प्रेमिका को लिखा गया वह 'दार्शनिक सुसाइड नोट' (या शहादत से पहले का पत्र) है, जिसमें वह अपनी अधूरी रह गई प्रणय-कविताओं के लिए माफ़ी मांगता है। यह कविता हमें सिखाती है कि जब व्यवस्था खूंखार हो जाए, तो साहित्य में व्यंग्य और विद्रोह केवल पन्नों तक सीमित नहीं रह सकता, उसे ज़मीन पर उतरना ही पड़ता है।

Young portrait of revolutionary poet Avtar Singh Sandhu Pash in black and white

आँखों में प्रेम और विद्रोह की चमक: युवा पाश

कविता का मूल पाठ: मैं अब विदा लेता हूँ

▶ पूर्ण देवनागरी कविता (यहाँ क्लिक करें)
मेरी दोस्त, मैं अब विदा लेता हूँ मैंने एक कविता लिखनी चाही थी सारी उम्र जिसे तुम पढ़ती रह सकतीं उस कविता में महकते हुए धनिए का ज़िक्र होना था ईंख की सरसराहट का ज़िक्र होना था... (वह आगे बताता है कि कैसे वह प्रेम और प्रकृति की कविता लिखना चाहता था, लेकिन...) लेकिन बहुत ही बेस्वाद है दुनिया के इस उलझे हुए नक़्शे से निपटना और यदि मैं लिख भी लेता शगनों से भरी वह कविता तो उसे वैसे ही दम तोड़ देना था तुम्हें और मुझे छाती पर बिलखते छोड़कर मेरी दोस्त, कविता बहुत ही निःसत्व हो गई है जबकि हथियारों के नाख़ून बुरी तरह बढ़ आए हैं और अब हर तरह की कविता से पहले हथियारों से युद्ध करना ज़रूरी हो गया है... (विदाई के इस पल में वह प्रकृति और प्रेम का शुक्रिया अदा करता है...) मैं इस विदाई के पल शुक्रिया करना चाहता हूँ उन सभी हसीन चीज़ों का जो हमारे मिलन पर तंबू की तरह तनती रहीं... मैं आदमी हूँ, बहुत कुछ छोटा-छोटा जोड़कर बना हूँ और उन सभी चीज़ों के लिए जिन्होंने मुझे बिखर जाने से बचाए रखा मेरे पास बहुत शुक्राना है... तुम यह सभी कुछ भूल जाना मेरी दोस्त, सिवाय इसके कि मुझे जीने की बहुत लोचा थी कि मैं गले तक ज़िंदगी में डूबना चाहता था मेरे भी हिस्से का जी लेना, मेरी दोस्त, मेरे भी हिस्से का जी लेना!

स्रोत : पुस्तक: लहू है कि तब भी गाता है (पृष्ठ 61) | अनुवाद: चमनलाल

▶ Hinglish Transliteration (Click to read)
Meri dost, main ab vida leta hoon... Maine ek kavita likhni chahi thi Saari umr jise tum padhti reh saktin Us kavita mein Mehakte hue dhaniye ka zikr hona tha Eenkh ki sarsarahat ka zikr hona tha... Meri dost, kavita bahut hi nissatva ho gayi hai Jabki hathiyaron ke nakhun buri tarah badh aaye hain Aur ab har tarah ki kavita se pehle Hathiyaron se yuddh karna zaroori ho gaya hai... Tum yeh sabhi kuch bhool jana meri dost, Sivay iske Ki mujhe jeene ki bahut locha thi Ki main gale tak zindagi mein doobna chahta tha Mere bhi hisse ka jee lena, meri dost, Mere bhi hisse ka jee lena!

गहन मनोवैज्ञानिक, मानसिक और दार्शनिक विश्लेषण

इस कविता का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक द्वंद्व (Psychological Conflict) है—"Survival Guilt" और "Romantic Desire" के बीच का टकराव। कवि को अपनी प्रेमिका के चुंबनों और आलिंगनों से गहरा प्रेम है, लेकिन जब बाहर "हथियारों के नाख़ून बढ़ आए हों", तो एक ज़िम्मेदार इंसान के लिए केवल प्रेम में डूबे रहना एक मानसिक अपराध बन जाता है।

पाश यहाँ यह स्थापित करते हैं कि सच्चा प्यार करने वाला ही सबसे बड़ा योद्धा हो सकता है। वह कहते हैं—"प्यार करना और लड़ सकना... जीने पर ईमान ले आना मेरी दोस्त, यही होता है।" यह विचार हमें दुष्यंत कुमार की कविताओं की याद दिलाता है, जहाँ प्रेम और आग एक साथ जलते हैं। पाश की यह विदाई महज़ एक ब्रेकअप नहीं है; यह एक बड़ी लड़ाई के लिए एक छोटी दुनिया की कुर्बानी है।

राजनीतिक और समकालीन इतिहास (Timeline Context)

यह कविता 1970-80 के दशक की उग्र वामपंथी (नक्सल) पृष्ठभूमि में लिखी गई। सत्ता का दमन इतना क्रूर था कि साधारण जीवन जीना नामुमकिन हो गया था। जब पाश कहते हैं, "कविता बहुत ही निःसत्व हो गई है," तो वह 'गीत फरोश' (भवानी प्रसाद मिश्र) के बाज़ारू हो चुके गीतों पर कटाक्ष करते हैं। उस दौर में रूमानी कविताएँ लिखना ज़मीनी हकीकत से आँखें चुराने जैसा था। जिस तरह रामधारी सिंह दिनकर ने 'परशुराम की प्रतीक्षा' में देश को झकझोरा था, पाश ने इस कविता से युवाओं को बताया कि जब युद्ध थोप दिया जाए, तो "हथियारों से युद्ध करना ज़रूरी हो जाता है।"

हिंदी व्याकरण: लय, छंद और ग्रामीण बिंब (Imagery)

  • छंद और धारा (Meter and Flow): यह गद्यगीत (Prose Poetry) या मुक्त छंद है। इसमें बातचीत की शैली (Conversational Tone) है, जिससे यह सीधे पाठक के दिल में उतरती है।
  • ग्राम्य बिंब (Rustic Imagery): पाश ने पंजाब के गाँवों की आत्मा को शब्दों में पिरोया है—"महकते हुए धनिए", "ईंख (गन्ने) की सरसराहट", "बाल्टी में चोए दूध पर गाती झाग", "लोहार की भट्ठी की तरह तपनेवाले गाँव के टीले"।
  • विरोधाभास (Oxymoron/Contrast): एक तरफ़ "तेरी कमर के लहरने की समुद्र से तुलना" का कोमल विचार है, और दूसरी तरफ "बारूद की तरह भड़क उठना" का कठोर यथार्थ। अदम गोंडवी की तरह पाश भी यथार्थ की खुरदुरी ज़मीन पर खड़े होकर बात करते हैं।
Pash Avtar Singh Sandhu giving a public speech into a vintage microphone

जनता की आवाज़: पाश (अवतार सिंह संधू)

निष्कर्ष: "मेरे भी हिस्से का जी लेना!"

कविता का अंत साहित्य के इतिहास के सबसे रुला देने वाले अंत में से एक है। "मेरे भी हिस्से का जी लेना, मेरी दोस्त!"—यह सिर्फ़ एक पंक्ति नहीं, बल्कि एक शहीद की वसीयत है। आज की कॉर्पोरेट (Finance) और मनोरंजन (Sports) की भागदौड़ में, जहाँ हम 'बनिए' (मुनाफ़ाखोर) बन चुके हैं, पाश हमें याद दिलाते हैं कि ज़िंदगी के फैले हुए आकार पर फ़िदा होना ही असली शूरवीरता है।

चाहे वह विष्णु विराट का 'दर्द देंगे वो सिसकियाँ देंगे' हो या सर-ए-तूर हो मेरी ज़िंदगी का दर्द, पाश की यह विदाई इन सबसे अलग, ज़मीन से जुड़ी हुई एक महकती हुई शहादत है। अधिक बेहतरीन विश्लेषण और कविताओं के लिए Sahityashala, हमारे English blogs और Maithili Poems से जुड़े रहें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. "मैं अब विदा लेता हूँ" कविता में पाश ने विदाई क्यों ली?

पाश ने इस कविता में अपनी प्रेमिका से इसलिए विदाई ली क्योंकि तत्कालीन दमनकारी राजनीतिक परिस्थितियों में उनके लिए प्रेम में डूबे रहना संभव नहीं था। उन्हें अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए 'हथियारों से युद्ध' का रास्ता चुनना पड़ा।

2. "मेरे भी हिस्से का जी लेना" पंक्ति का क्या अर्थ है?

इस अत्यंत मार्मिक पंक्ति में कवि अपनी प्रेमिका से कहता है कि क्रांति के मार्ग पर चलते हुए शायद वह ज़िंदा न बचे, इसलिए वह चाहता है कि उसकी प्रेमिका उसके हिस्से की ज़िंदगी, खुशियाँ और प्यार भी अपने जीवन में जिए।

3. इस कविता में पाश ने किन ग्रामीण चीज़ों का ज़िक्र किया है?

कविता में पंजाब के ग्रामीण जीवन के बहुत सुंदर बिंब हैं, जैसे— महकता हुआ धनिया, गन्ने (ईंख) की सरसराहट, बाल्टी में दुहे गए दूध की झाग, सरसों के फूल और लोहार की भट्ठी की तरह तपने वाले गाँव के टीले।

पाश को सुनें और समझें (Video Analysis)

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